लखीमपुर कांड के आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका! बेटियों के जन्मदिन का दिया हवाला, फिर भी नहीं मिली अतिरिक्त राहत
जमानत की शर्तों में और ढील मांगने पहुंचे आशीष मिश्रा को शीर्ष अदालत ने पहले ट्रायल कोर्ट जाने को कहा; पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल न हो पाने का रखा गया पक्ष

बेटियों के जन्मदिन से लेकर पारिवारिक आयोजनों तक का दिया हवाला… लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल जमानत की शर्तों में और राहत देने से हाथ खींच लिए। आखिर अदालत ने आशीष मिश्रा से क्या कहा और अब उनके पास क्या रास्ता बचा है?

लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल जमानत की शर्तों में कोई अतिरिक्त राहत नहीं मिली है। जमानत की मौजूदा शर्तों में और ढील की मांग पर शीर्ष अदालत ने हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उन्हें पहले ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा है।
सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा की तरफ से पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल न हो पाने का मुद्दा उठाया गया। वहीं मामले से जुड़े दूसरे पक्ष की ओर से ट्रायल की प्रक्रिया को लेकर सवाल और शिकायतें अदालत के सामने रखी गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर जमानत की शर्तों में बदलाव करने के बजाय साफ किया कि ऐसी मांगों और संबंधित शिकायतों को पहले ट्रायल कोर्ट के सामने रखा जाना चाहिए।
बेटियों के जन्मदिन का जिक्र, मांगी गई और राहत
सुनवाई का सबसे अहम पहलू तब सामने आया, जब आशीष मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने मौजूदा जमानत शर्तों से होने वाली व्यावहारिक परेशानियों का हवाला दिया।
दलील दी गई कि जमानत पर लगी पाबंदियों के कारण आशीष मिश्रा अपने परिवार के कई कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। यहां तक कहा गया कि वह अपनी बेटियों के जन्मदिन जैसे पारिवारिक आयोजनों में भी शामिल नहीं हो सके।
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से जमानत की शर्तों में कुछ और ढील देने का अनुरोध किया गया। लेकिन शीर्ष अदालत ने तत्काल अतिरिक्त राहत देने के बजाय इसके लिए ट्रायल कोर्ट को उपयुक्त मंच माना।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया अब कहां लगानी होगी गुहार
अदालत के रुख से आशीष मिश्रा के लिए आगे का रास्ता भी स्पष्ट हो गया है। अगर उन्हें जमानत की मौजूदा शर्तों में किसी तरह का बदलाव या अतिरिक्त छूट चाहिए तो उन्हें इसके लिए पहले संबंधित ट्रायल कोर्ट में आवेदन करना होगा।
ट्रायल कोर्ट मामले की परिस्थितियों, उपलब्ध तथ्यों और संबंधित पक्षों को ध्यान में रखते हुए ऐसे आवेदन पर विचार कर सकता है। यानी सुप्रीम कोर्ट ने राहत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया, लेकिन फिलहाल खुद जमानत शर्तों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
2021 की उस घटना से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला 3 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क्षेत्र में हुई हिंसा से जुड़ा है। किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। इनमें चार किसान, एक पत्रकार और बाद की हिंसा में तीन अन्य लोग मारे गए थे।
मामले ने उस समय राष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त राजनीतिक और कानूनी हलचल पैदा की थी। आशीष मिश्रा इस मामले में आरोपी हैं। उनके खिलाफ मामला अदालत में विचाराधीन है और उन्हें पहले ही जमानत कुछ शर्तों के साथ मिली हुई है।
अब निगाहें ट्रायल कोर्ट पर
सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आशीष मिश्रा जमानत की शर्तों में राहत के लिए ट्रायल कोर्ट पहुंचेंगे? और अगर आवेदन किया जाता है तो ट्रायल कोर्ट उस पर क्या फैसला करेगा?
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल कोई अतिरिक्त छूट नहीं दी है। इसलिए आशीष मिश्रा की जमानत से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था में फिलहाल कोई नई राहत नहीं जुड़ी है।
बहुचर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में कानूनी लड़ाई जारी है और अब जमानत शर्तों में बदलाव की अगली संभावित लड़ाई ट्रायल कोर्ट में देखने को मिल सकती है।



